मोहम्मद आरिफ खान:उत्तराखंड व उत्तरप्रदेश में कच्ची शराब पीने के कारण 32 लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोगों की हालात गंभीर बताई जा रही है। इस घटना के बाद 13 आबकारी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
इस बड़ी घटना के बाद सिद्धार्थनगर जिले में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। जिलाधिकारी कुणाल शिल्कू ने सभी शराब पीने वालों से अपील की है कि वह अवैध शराब यानी कच्ची शराब का सेवन ना करें।
उन्होंने कहा कि अबैध शराब सेवन व विक्री पर कड़ी दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी। पुलिस व आबकारी की संयुक टीम के द्वारा पूरे जनपद में छापेमारी की जाएगी।
अभी मामला गर्म है तब कार्यवाई की बात की जा रही है। लेकिन कार्यवाई कहा हो रही है या हुई वो समझ नही आ रहा है कच्ची शराब के जो अड्डे थे वहाँ धंधा जोरों से चल रहा है।
जिले में अवैध शराब का धंधा जमकर फलफूल रहा है। और ये सब कुछ पुलिस प्रशासन के जानकारी में हो रहा है। दिखावे के लिए कभी कभी कुछ जब्त कर लिया जाता है लेकिन एक सप्ताह बीतने के बाद फिर सब कुछ ठीक हो जाता है और धंधा जोर पकड़ लेता है फिर क्या है सब मिलकर बाटकर खाते है कार्यवाई कौन करता है।
बढनी ब्लॉक के तौलिहवा ग्राम पंचायत के इटहिया, बालानगर, कचरिहवा जैसे दर्जनों गांवों में कच्ची शराब का धंधा बड़े जोर व शोर से चल रहा है ऐसा नही है कि उसके बारे में पुलिस प्रशासन के लोग कुछ ना जानते हो, जानते सब कुछ है बस अनजान बने हुए है। हो सकता है इस इंतजार में हो कि कुशीनगर और सहारनपुर की तरह कोई घटना जिले में हो तब कार्यवाई करें।
मामला इतना गंभीर है कि इन गांवों की महिलाए, बच्चे और पुरुष हर किसी ने इसे अपना धंधा बना लिया है। इससे वो बाहर निकलना ही नही चाहते।
इन गांवों के बच्चों का भविष्य क्या होगा साहब जो बचपन से ही शराब के भट्टियों में जल रहे हैं। इन गाँवो में शाम के समय दर्जनों गाँवो के लोग लाइन लगाते है शराब के लिए और उन्हें शराब परोसते नजर आएंगे बच्चें, महिलाए जैसे जैसे रात काली होती है वैसे ही पूरा गांव शराब के गंध में लिप्त हो जाता है।
मैं जब वहाँ गया पीपल के पेड़ के नीचे एक खटिए पर कुछ लोग बैठे थे, मै भी बैठा बातें शुरू हुई मैंने पूछ लिया बच्चें स्कूल जाते हैं? लड़खड़ाते जुबान में उसने किया जवाब दिया समझ नही आया। मैने शिक्षा के महत्व को बड़ा जोर देकर लगभग 15 मिनट तक समझाया अंत में सबकुछ चुपचाप सुन लेने के बाद उसने कहा पौवा भर का पैसा दे दीजिए पीना है। इससे आप अंदाजा लगा सकते है कि वहां के बच्चों का भविष्य क्या होगा और वो कैसे आगे बढेगें।

