सिद्धार्थ नगर इटवा
उत्तर प्रदेश में सुशासन का दावा करने वाले भाजपा सरकार में अब अधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं। शुक्रवार को अराजकता की सारी हदें टूट गयी।
कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी तहसीलदार इटवा राजेश अग्रवाल के कोर्ट में जब वह मुकदमें की सुनवाई कर रहे थे। इसी बीच निलम्बित लेखपाल कमलेश मिश्र व उसके पुत्र ने अपने साथियों के साथ कोर्ट में घुस कर गाली-गलौज किया।
जिससे उनको दिल कर दौरा पडा। तहसील कर्मचारियों ने उनको अस्पताल में भर्ती कराया जानकारी के अनुसार तहसीलदार इटवा राजेश अग्रवाल ने बताया कि शुक्रवार को
मैं अपने कोर्ट में मुकदमें की सुनवाई कर रहा था।
इसी बीच लगभग ग्यारह बजे निलम्बित लेखपाल कमलेश मिश्र अपने पुत्र शुभम और अपने छा साथियों के साथ मेरे कोर्ट में घुस कर गाली-गलौज करने लगा। विरोध करने पर उक्त लोगों ने गोलियों से भून देने की धमकी देने लगे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लगभग आधे घंटे तक पूरे तहसील परिसर में अफरातफरी और भय का माहौल बन गया था। तहसील सूत्रों के अनुसार वादा कारी और अधिवक्ताओं से भरे कोर्ट में स्वयं के साथ घटी घटना से तहसीलदार को दिल
का दौरा पडा।
तहसील में मौजूद कर्मचारी व अधिवक्ता उनको आनन फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटवा ले गए। जहां उनको तीन बजे तक इलाज के लिए रखा गया।
सूत्रों का कहना है कि सुशासन का दम भरने वाले इस भाजपा सरकार में ईमानदार अधिकारी के जान, माल और सुरक्षा से बढ़ कर राजनीति है।
पूर्व में किए गए दुर्व्यवहार के कारण उसे निलम्बित किया गया था। लेकिन राजनीतिक छत्र छाया में उसकी बहाली होने वाली थी। राजनीतिक सपोट मिलने पर उसने एकबार फिर
न्याय के मन्दिर की गरिमाा को तार तार कर दिया गया।
जबकि निलम्बित लेखपाल कमलेश मिश्र का कहना है कि अमौना वाले प्रकरण में पत्रावली की जाँच कर रहा था। इसी बीच वह मेरे उपर भड़क गए।
