रत्नेश कुमार: महात्मा गांधी जिन्हें हिंदुत्ववादी शक्तियां अपने रास्ते से हटाने में सफल हो गई थी साल 1947 48 में हिंदुत्ववादी शक्तियों की आंखों में महात्मा गांधी का मानवतावाद खटक रहा था। हिंदुत्व मानवतावाद का सबसे बड़ा दुश्मन है और मोहब्बतवाद का भी, मानवतावाद और मोहब्बतवाद के आगे हिंदुत्ववाद असहाय महसूस करता है।
साल 1947 48 में हिंदुत्ववादी के विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा गांधी थे। गांधी के मानवतावाद के आगे सावरकर नाथूराम गोडसे का हिंदुत्ववाद हकला रहा था।
महात्मा गांधी की रघुपति राघव राजाराम पतित पावन सीताराम 'ईश्वर अल्लाह तेरो नाम' के सामने हिंदुत्ववाद का हिंदुत्व हिल रहा था। हिंदुत्ववादी शक्तियों ने अपने समर्पित सिपाही नाथूराम गोडसे से पाकिस्तान मुसलमान की मदद की बात करने वाले महात्मा गांधी को मौत के घाट उतरवा दिया था।
हिंदुत्ववादी नेता गण 2019 में भी यह साहस नहीं कर पा रहे हैं कि वह सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार करें कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की नृशंस हत्या का षड्यंत्र नागपुर में रचा और संपादित किया गया था।
30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या से मानवतावादी हिंदू यानि अहिंसक हिन्दू कमजोर हुआ और हिंदुत्ववादी यानी हिंसक हिंदू शक्तिशाली हुआ।
गांधी को हिंदुत्ववादी विचार पथ से हटाना आसान होता तो अब तक हटा दिया गया होता क्योंकि गोडसे वादियों की संख्या सैकड़ों में है वे सिर्फ भारत में हैं लेकिन महात्मा गांधी भारत तक सीमित नहीं है पूरी दुनिया में लोग महात्मा गांधी के प्रति सम्मान रखते हैं।
गांधी की हत्या करने वाले गोड़सेवादी विचारधारा के लोग आज भारत से मोहब्बतवाद को खत्म करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। मानवतावाद के पुजारी महात्मा गांधी की तरह मोहब्बतवाद का हर प्रतीक गोड़सेवादियों की नजरों में खटक रहा है।

