नई दिल्ली मोदी सरकार में पूरी तरह से नजरअंदाज किए जाने वाले बीजेपी के फायर ब्रांड नौजवान लीडर व सुल्तानपुर से सांसद वरुण गांधी और कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी का भरत मिलाप जल्द हो सकता है.
हालांकि वरुण गांधी की तरफ से पूरी तरह से चुप है और किसी तरह का बयान नहीं आया है सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने अपने चचाजाद भाई को कांग्रेस में आने के लिए हरी झंडी दे दी है. सूचना के अनुसार जिस तरह बहन प्रियंका गांधी के लिए कांग्रेस के दरवाजे हमेशा के लिए खुले हैं और वह कभी भी सियासत में आ सकती हैं इसी तरह राहुल गांधी ने वरुण गांधी के लिए भी दरवाजे खोल दिए हैं.
कांग्रेस अध्यक्ष ने वरुण गाँधी को दावत दी है की वो कभी भी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। इसी के साथ खबर ये भी है की वरूण गांधी ना सिर्फ जल्द ही कांग्रेस में शामिल होंगे बल्कि वो कांग्रेस के तरफ से लोकसभा के उम्मीदवार भी होंगे।
खबर है कि जैसे ही प्रियंका गाँधी राजनीति के मैदान में उतरेंगी तो इनके साथ वरुण गांधी भी आएंगे। अब ये खबर तेजी से आम हो रही है की वरुण गाँधी जल्द ही कांग्रेस में शामिल होंगे और कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे।
खबर यह भी है की आने वाले दिनों में वरुण गांधी को उत्तर प्रदेश कांग्रेस की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है कांग्रेसी नेताओं के मुताबिक राहुल गांधी ने वरुण गांधी को पार्टी में किसी भी वक्त शामिल होने को हरी झंडी दे दी है. और दो-तीन दिनों में इस संबंध में वरुण गांधी की तरफ से कोई बड़ा फैसला हो सकता है हालांकि इस पर फिलहाल वरुण गांधी खामोश है.
वरुण गांधी इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी के बेटे हैं वह राहुल गांधी के चचाजाद भाई हैं वरुण गांधी के राहुल गांधी के साथ रिश्ते कैसे हैं इस पर बात की जा सकती है। लेकिन प्रियंका गांधी के साथ वरुण गांधी के बहुत अच्छे रिश्ते हैं और प्रियंका गांधी भी वरुण गांधी को राहुल गांधी की तरह चाहती हैं।
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी आलाकमान की तरफ से वरुण गांधी को राहुल गांधी के लोकसभा सीट अमेठी जाने को कहा गया था. अमेठी से नरेंद्र मोदी के करीबी मानी जाने वाली और मशहूर टीवी कलाकार स्मृति ईरानी उम्मीदवार थीं. इनके तरफ से वरुण गांधी को चुनावी अभियान में जाने को कहा गया था दरअसल वरुण गांधी जब से सियासत में आए हैं, कभी भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ भाषण नहीं दिया और ना ही इनके लोकसभा क्षेत्र में गए थे.
दरअसल वरुण गांधी ने पार्टी आलाकमान के आदेश को ठुकरा दिया था जिसके कारण पहली बार लोकसभा सदस्य चुने गए लोगों को केन्द्रीय मंत्री बनाया गया लेकिन वरुण गांधी को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया।
हालांकि वरुण गांधी की मां मेनका गांधी को केंद्रीय मंत्री बनाया गया है लेकिन वरुण गांधी को हर स्तर पर कमजोर करने की कोशिश की गई। इस नाइंसाफी के खिलाफ वरुण गांधी अक्सर बोलते भी रहे हैं और अलग अलग अंदाज में इसका इजहार करते रहे हैं।
जिस तरह लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा, शत्रुघन सिंहा आदि को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया इसी तरह वरुण गांधी को भी नजरअंदाज किया गया। शत्रुघन सिंहा यशवंत सिन्हा अरुण शौरी आदि तो खुलकर मैदान में आ गए हैं और अब वरुण गांधी के आने का इंतजार है।

