बाढ़ प्रभावित गाँवो मे पानी हटने के बाद भी लोग बाँधो पर रहने के लिए मजबूर हैं। कच्चे व फूस के मकान बाढ़ मे गिर जाने से कुछ ग्रामीण बाँध पर मजबूरी मे रात गुजार रहें हैं। वही कुछ के घरों मे अभी पानी के कारण कीचड़ व नमी है।
इटवा तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गाँवो मे ग्रामीण रात बाँध पर खुले आसमान के नीचे बिता रहे हैं। ग्राम खखरा व चेचराफ खुर्द मे अभी भी लोग रात मे घर पर नहीं रूक रहें है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के पानी के कारण घरो मे नमी है जिससे साँप बिच्छू बाहर निकल रहे है। कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है। बाढ़ मे फूस के कच्चे मकान गिरने से कई परिवार बाँध पर रहने को मजबूर हैं। लोगों ने तिरपाल तान कर बाँध पर अस्थायी घर बना लिया है। पानी खत्म होने के बाद लोगों की मजबूरी खत्म होने का नाम नही ले रही है।
ग्रामीणों की मागं है कि आवास के लिए धन देने के साथ बाढ़ के उच्चतम बिन्दु तक नींव डालने के साथ मिट्टी पाटने के लिए अतिरिक्त धन दिया जाए। तभी लोगों को बाढ़ के कहर से निजात मिल सकती है।
इटवा तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गाँवो मे ग्रामीण रात बाँध पर खुले आसमान के नीचे बिता रहे हैं। ग्राम खखरा व चेचराफ खुर्द मे अभी भी लोग रात मे घर पर नहीं रूक रहें है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के पानी के कारण घरो मे नमी है जिससे साँप बिच्छू बाहर निकल रहे है। कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है। बाढ़ मे फूस के कच्चे मकान गिरने से कई परिवार बाँध पर रहने को मजबूर हैं। लोगों ने तिरपाल तान कर बाँध पर अस्थायी घर बना लिया है। पानी खत्म होने के बाद लोगों की मजबूरी खत्म होने का नाम नही ले रही है।
ग्रामीणों की मागं है कि आवास के लिए धन देने के साथ बाढ़ के उच्चतम बिन्दु तक नींव डालने के साथ मिट्टी पाटने के लिए अतिरिक्त धन दिया जाए। तभी लोगों को बाढ़ के कहर से निजात मिल सकती है।

