इसरार अहमद
हमारी राह में आये तो पर्वत तोड़ देते हैं.......
क्रासर - मुशायरा व कवि सम्मेलन इटवा तहसील क्षेत्र के ग्राम रेहरा उर्फ भैंसाही (बढ़या) में अब्बास चौधरी मेमोरियल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के शिलान्यास पर मौलाना अबुल कलाम आजाद व पं. जवाहर लाल नेहरू की याद में मुशायरा व कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें शामिल होकर देश के नामचीन कवि व शायरों तथा कवियित्रियों ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।
उक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर जमाल कुद्दुसी व संचालन शायर नियाज कपिलवस्तवी ने किया। मासूम मिर्जा गालिब ने नाते पाक से कार्यक्रम को दिशा प्रदान किया। तत्तपश्चात कवि सुशील श्रीवास्तव (सागर) ने सरस्वती वंदना व अपनी रचना 'न तो हिन्दू हूं मैं न मुसलमान हूं मैं तो इंसान हूं सिर्फ इंसान हूं' से खूब वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि डा. ज्ञानेंद्र द्विवेदी (दीपक) ने 'हमारी राह में आये तो पर्वत तोड़ देते हैं जरूरी हो तो दरिया के भी मुख को मोड़ देते हैं, भरत हैं राम-लक्ष्मण हम हमारा इम्तिहां मत लो पिता के इक इशारे पर अयोध्या छोड़ देते हैं' से कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान किया, और लोगों में देश भक्ति का जज्बा भर दिया।
हास्य कवि राकेश त्रिपाठी (गंवार) ने अपनी पारी में कहा कि ' हम भारतवासी बोलो कब तक गद्दारी झेलेंगे अपने कर्मों का फल किस दिन ये भ्रष्टाचारी झेलेंगे, पूंछ रहा है लालकिले से नभचुम्बी परचम अपना सीमा के प्रहरी आखिर कब तक लाचारी झेलेंगे' से जहां लोगों को सोचने पर विवश कर दिया वहीं 'सब मुर्गियां वही हैं अंडे बदल गए हैं ये घाट है पुराना पण्डे बदल गए है' सुनाकर खूब तालियां बटोरी।
इसी क्रम में वरिष्ठ कवि ब्रम्हदेव शास्त्री (पंकज) ने कहा कि ' राम धरा पर कब आओगे फिर हमने रावन देखा है' जिसपर उन्हें खूब सराहा गया। शायर व कार्यक्रम के संचालक नियाज कपिलवस्तवी ने ' काम कोई हमारा रुकेगा नही दूसरों के जो हम काम आते रहें' से खूब तालियां बटोरी। युवा रचनाकार पंकज सिद्धार्थ ने कहा 'आओ भारत की सीमा का दर्शन करें एक दीपक शहीदों को अर्पन करें' जिसे लोगों ने खूब सराहा। कवियित्री डा. चेतना पांडेय ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति से लोगों को सोचने पर विवश कर दिया।
उक्त के हास्य कवि विकास बौखल ने अपनी रचनाओं से लोगों को खूब हंसाया।शायर सुहेल आजाद मालेगांव, अकमल बलरामपुरी, शायरा चांदनी शबनम व गुले सबा, मंजर अब्बास रिज्वी, संघशील झलक, सहाब मजरूह आदि ने भी खूब वाहवाही बटोरी। उक्त दौरान उपजिलाधिकारी इटवा, असरार फारूकी, डा. अखलाख हुसैन, मैनुद्दीन कमरुज्जमा खां, मेराज मुस्तफा, अतीकुर्रहमान, शाहिद हुसैन आदि सहित काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।

