विनोद चौधरी शोहरतगढ़ सिद्धार्थनगर: तहसील क्षेत्र शोहरतगढ़ के बाजार से खाद की बोरियां गायब हो गई है। किसान यूरिया के लिए भटक रहा है। साधन सहकारी समितियों के गोदाम भी खाली हो गए है।
प्राइवेट दुकानों पर दस दिनों से किल्लत पैदा हो गई है। अच्छी बारिश होने के बाद किसानों के चेहरे खिल गए थे। अब खाद नहीं मिलने से उन्हें मायूस होना पड़ रहा है। जिनके पास यूरिया उपलब्ध है वह मौके का फायदा उठाने से नहीं चूक रहे है। यूरिया के साथ जिंक का पैकेट भी बेच रहे है।
ग्रामीण क्षेत्रों में खाद की किल्लत पैदा होने लगी है। किसान खेतों में यूरिया डालने के लिए बाजारों में भटक रहे है। सहकारी समितियों के गोदाम भी खाली हो गए है। इस समय खेतों को यूरिया खाद की आवश्यकता है। धान की बालियां फूटने के तैयार होने लगी है।
स्थानीय स्तर पर अधिकतर साधन सहकारी समितियां सूखी है। खाद के लिए लाइन लगाने के बाद किसान निराश लौट रहे हैं। मजबूर किसानों के पास फसल बचाने के लिए इकलौता रास्ता प्राइवेट दुकानों से खाद खरीदना पड़ रहा है। ईपीओएस व्यवस्था लागू होने के बाद प्राइवेट दुकानों पर भी किसानों को अंगूठे की छाप देने का नियम लागू जरूर है, लेकिन उन्हें ¨प्रट रेट से अधिक मूल्य पर खाद दी जा रही है।
इसी का परिणाम है कि सप्ताह भर से प्राइवेट दुकानों पर से अचानक खाद गायब हो गई। अगर किसी दुकान पर यूरिया खाद है भी तो वह भी मौके का फायदा उठा रहा है। दुकानदार यूरिया के साथ दो पैकेट ¨जक भी किसानों को लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
खाद की किल्लत पैदा होने लगी है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी सीबी सीबी ने कहा कि अगस्त में लक्ष्य के सापेक्ष यूरिया का आवंटन हुआ था। सितंबर के लिए जिले को पांच सौ मिट्रिक टन यूरिया आवंटित है। समितियों में जल्द खाद आ जाएगी। अधिक दर पर खाद बेचने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी
प्राइवेट दुकानों पर दस दिनों से किल्लत पैदा हो गई है। अच्छी बारिश होने के बाद किसानों के चेहरे खिल गए थे। अब खाद नहीं मिलने से उन्हें मायूस होना पड़ रहा है। जिनके पास यूरिया उपलब्ध है वह मौके का फायदा उठाने से नहीं चूक रहे है। यूरिया के साथ जिंक का पैकेट भी बेच रहे है।
ग्रामीण क्षेत्रों में खाद की किल्लत पैदा होने लगी है। किसान खेतों में यूरिया डालने के लिए बाजारों में भटक रहे है। सहकारी समितियों के गोदाम भी खाली हो गए है। इस समय खेतों को यूरिया खाद की आवश्यकता है। धान की बालियां फूटने के तैयार होने लगी है।
स्थानीय स्तर पर अधिकतर साधन सहकारी समितियां सूखी है। खाद के लिए लाइन लगाने के बाद किसान निराश लौट रहे हैं। मजबूर किसानों के पास फसल बचाने के लिए इकलौता रास्ता प्राइवेट दुकानों से खाद खरीदना पड़ रहा है। ईपीओएस व्यवस्था लागू होने के बाद प्राइवेट दुकानों पर भी किसानों को अंगूठे की छाप देने का नियम लागू जरूर है, लेकिन उन्हें ¨प्रट रेट से अधिक मूल्य पर खाद दी जा रही है।
इसी का परिणाम है कि सप्ताह भर से प्राइवेट दुकानों पर से अचानक खाद गायब हो गई। अगर किसी दुकान पर यूरिया खाद है भी तो वह भी मौके का फायदा उठा रहा है। दुकानदार यूरिया के साथ दो पैकेट ¨जक भी किसानों को लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
खाद की किल्लत पैदा होने लगी है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी सीबी सीबी ने कहा कि अगस्त में लक्ष्य के सापेक्ष यूरिया का आवंटन हुआ था। सितंबर के लिए जिले को पांच सौ मिट्रिक टन यूरिया आवंटित है। समितियों में जल्द खाद आ जाएगी। अधिक दर पर खाद बेचने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी

