सिद्धार्थनगर। लोकसभा चुनाव को लेकर टिकटों की दावेदारी तेज़ हो गई है। डुमरियागंज लोकसभा सीट से सामाजवादी पार्टी के नेता बदरे आलम ने भी अपनी दावेदारी पेश कर दी है। अपनी दावेदारी की खुलेआम घोषणा कर उन्होंने सपा की सियासी गर्मी बढ़ा दी है।
डुमरियागंज लोकसभा सीट से दो बार चुनाव लड़ चुके माता प्रसाद पांडेय मज़बूत दावेदार माने जा रहे हैं लेकिन पिछले दो चुनावों में उनके तीसरे नम्बर पर रहने से इस बार उनकी दावेदारी कमजोर हुई है।
सपा नेता बदरे आलम का मत स्पष्ट है। वे पार्टी को यह समझाने मे लगे हैं कि ३० फीसदी से अधिक मुस्लिम मतदाता वाले इस लोकसभा क्षे़त्र में ढाई से तीन लाख मुस्लिम मत पोल होते हैं। इसके अलावा पिछड़े वोटों को मिला कर मजबूत गणित तैयार होती है। ऐसे में यदि उन्हें टिकट दिया जाये तो सीट को जीत भी सकते हैं।
उनका यह भी कहना है कि गत विधानसभा चुनावों में जिले में एक भी मुस्लिम को प्रत्यशी न बनाये जाने से नाराज मुसलमान उनके नाम के कारण पुनः सपा में आ सकते हैं। उनका दावा है कि वे यह बात सपा के कई वरिष्ठ नेताओं को समझाने में सफल भी रहे हैं। अब अगर सपा अध्यक्ष अखिलेश जी यह बात समझते हैं तो उनका टिकट यकीनी है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मौलाना अब्दुल क़य्यूम रहमानी के पुत्र बदरे आलम के दावेदारी के बाद जिले में सियासी हलचल तेज़ हो गई है।
हालांकि एक दावेदार राज्यसभा सांसद आलोक तिवारी भी हैं। लेकिन सूत्र बताते हैं कि उनके नाम को लेकर अखिलेश यादव को दिलचस्पी नहीं है। वे क्षे़त्र से भी कटे कटे से रहते हैं। बहरहाल बदरे आलम की दावेदारी क्या रंग लायेगी, यह तो भव्ष्िय ही बतायेगा, लेकिन अपनी दावेदारी की खुलेआम घोषणा कर उन्होंने सपा की सियासी गर्मी तो बढ़ा ही दिया है।
डुमरियागंज लोकसभा सीट से दो बार चुनाव लड़ चुके माता प्रसाद पांडेय मज़बूत दावेदार माने जा रहे हैं लेकिन पिछले दो चुनावों में उनके तीसरे नम्बर पर रहने से इस बार उनकी दावेदारी कमजोर हुई है।
सपा नेता बदरे आलम का मत स्पष्ट है। वे पार्टी को यह समझाने मे लगे हैं कि ३० फीसदी से अधिक मुस्लिम मतदाता वाले इस लोकसभा क्षे़त्र में ढाई से तीन लाख मुस्लिम मत पोल होते हैं। इसके अलावा पिछड़े वोटों को मिला कर मजबूत गणित तैयार होती है। ऐसे में यदि उन्हें टिकट दिया जाये तो सीट को जीत भी सकते हैं।
उनका यह भी कहना है कि गत विधानसभा चुनावों में जिले में एक भी मुस्लिम को प्रत्यशी न बनाये जाने से नाराज मुसलमान उनके नाम के कारण पुनः सपा में आ सकते हैं। उनका दावा है कि वे यह बात सपा के कई वरिष्ठ नेताओं को समझाने में सफल भी रहे हैं। अब अगर सपा अध्यक्ष अखिलेश जी यह बात समझते हैं तो उनका टिकट यकीनी है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मौलाना अब्दुल क़य्यूम रहमानी के पुत्र बदरे आलम के दावेदारी के बाद जिले में सियासी हलचल तेज़ हो गई है।
हालांकि एक दावेदार राज्यसभा सांसद आलोक तिवारी भी हैं। लेकिन सूत्र बताते हैं कि उनके नाम को लेकर अखिलेश यादव को दिलचस्पी नहीं है। वे क्षे़त्र से भी कटे कटे से रहते हैं। बहरहाल बदरे आलम की दावेदारी क्या रंग लायेगी, यह तो भव्ष्िय ही बतायेगा, लेकिन अपनी दावेदारी की खुलेआम घोषणा कर उन्होंने सपा की सियासी गर्मी तो बढ़ा ही दिया है।

