दीपक कुमार:चेतिया रविवार को मझवन खुर्द गांव में निराश्रित मृत महिला का अंतिम संस्कार ग्रामीणों ने मिलकर पूरे विधि-विधान से किया। कानपुर की रहने वाली महिला को ग्रामीणों ने छ: वर्ष पूर्व गांव में शरण दी थी।
मझवन गांव के लोगों ने एक असहाय वृद्धा को लगभग 6 वर्ष पूर्व अपने यहां शरण दी तो रविवार को उसके निधन पर ग्रामीणों ने मिलकर उसका अंतिम संस्कार भी किया तथा पूरे विधि-विधान से उसका क्रिया कर्म करने की घोषणा की करीब 6 वर्ष पूर्व अपने परिवार की उपेक्षा की शिकार एक वृद्ध महिला भटकते-भटकते जिगनीहवा क्षेत्र के ग्राम मझवन खुर्द में पहुंची उसने जब अपनी दास्तान लोगों को बताई तो सब दंग रह गए उसने बताया कि वह मूल रूप से कानपुर के निवासी है तथा उसका नाम सुरसती देवी है उसके परिजनों ने उसे घर से निकाल दिया है जिससे भटकते-भटकते यहां पहुंच गई। ग्रामीणों को उस लाचार वृद्धा पर रहम आया तथा लोगों ने उसे अपना कर गांव में ही रहने की शरण दे दी तथा एक परिवार का स्नेह उसे देने लगे वृद्धा ने भी पूरे गांव के लोगों को अपना परिवार मान लिया और गांव में रहने लगी लगभग 85वर्षीय सुरसती देवी कि शनिवार को मृत्यु हो गई।
ग्रामीणों ने आपस में बैठकर तय किया कि यह गांव की एक सदस्य है इसका अंतिम संस्कार पूरे विधि विधान से किया जाए। उसके अंतिम संस्कार के समय राम कुमार प्रधान, हरिराम, यदुराज, चैतूराम, प्रकाश, रामजस, रामसागर, प्रीतम, शिवकुमार, जगदीश आदि लोग मौजूद रहे।

