अनवर शाह
बर्डपुर सिद्धार्थ नगर
भारत नेपाल सीमा से सटे हुये ताल पोखरों मे छोटी बडी झीलो मे आजकल विदेशी पंछियों का जमावड़ा सा लगा है ऐसा मनमोहक दृश्य लगभग सभी ताल पोखरों जैसे महशोइया डोइ नाला मर्थी मझौली सिसवा ताल रमवापुर ताल बजहा ताल पल्टा देवी पोखरा आदि तमाम झील ताल पोखरों मे तरह तरह के विदेशी पंछी दिख जायेगें जो दिन भर पानी मे कलाबाजी करते हुये देखे जा सकते है.
ज्ञात हो की सर्दियों के आगमन से ही ये दुर्लभ प्रजाति के मेहमान पंछी उत्तर भारत और नेपाल के ताल पोखरो झीलों मे ठंडी बिताने चले आते हैं और पूरे ठंड के मौसम तक इन्ही सब जलाशयों को अपना आशियाना बना लेते हैं । इनको देखकर रिफ्यूजी फिल्म का एक गाना याद आ जाता है "पंछी नदियाँ पवन के झोके कोई सरहद न इन्हें रोके"सर्दियों का मौसम जैसे ही खत्म होता है ये मेहमान पंछी फिर अपने वतन को उड जाते हैं .
इनके शिकार पर रोक है पर कुछ शिकारी शिकार भी कर लेते हैं पर चोरी छुपे शिकार करते हैं और मंहगे दामों मे बेचते भी है.
वैसे कुछ शिकारी पकडे भी जाते है जिनको कठोर दंड एवं जुर्माना लेकर छोड दिया जाता है...वैसे इनका शिकार अगर ऐसे होता रहा तो फिर इन दुर्लभ प्रजाति (मुर्गाबी, ब्लैक पाख्ता, कव्वारी आदि ) के पंछीयों को देख पाना मुश्किल हो जायेगा फिर ये मेहमान रूठ जायेगे और तब ये मनमोहक नाजारे को देखने के लिये हमारी आंखे तरस जायेगी
बर्डपुर सिद्धार्थ नगर
भारत नेपाल सीमा से सटे हुये ताल पोखरों मे छोटी बडी झीलो मे आजकल विदेशी पंछियों का जमावड़ा सा लगा है ऐसा मनमोहक दृश्य लगभग सभी ताल पोखरों जैसे महशोइया डोइ नाला मर्थी मझौली सिसवा ताल रमवापुर ताल बजहा ताल पल्टा देवी पोखरा आदि तमाम झील ताल पोखरों मे तरह तरह के विदेशी पंछी दिख जायेगें जो दिन भर पानी मे कलाबाजी करते हुये देखे जा सकते है.
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इनके शिकार पर रोक है पर कुछ शिकारी शिकार भी कर लेते हैं पर चोरी छुपे शिकार करते हैं और मंहगे दामों मे बेचते भी है.
वैसे कुछ शिकारी पकडे भी जाते है जिनको कठोर दंड एवं जुर्माना लेकर छोड दिया जाता है...वैसे इनका शिकार अगर ऐसे होता रहा तो फिर इन दुर्लभ प्रजाति (मुर्गाबी, ब्लैक पाख्ता, कव्वारी आदि ) के पंछीयों को देख पाना मुश्किल हो जायेगा फिर ये मेहमान रूठ जायेगे और तब ये मनमोहक नाजारे को देखने के लिये हमारी आंखे तरस जायेगी


