बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रति प्रशासन पूरी तरह संवेदनहीन बना हुआ है। जिले मे बाढ़ राहत कार्य सिर्फ मुख्यमंत्री को दिखाने तक था। मुख्यमंत्री के जाते ही हालात फिर बदतर हो गए। शनिवार को बचाव कार्य मे लगा सेना का हेलिकाप्टर कही नजर नही आया और ना तो पीड़ितों तक खाना पहुचाने की कोई सक्रियता नजर आई।
मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश के बावजूद भी प्रशासन उन गाँवो मे भी 24 घंटे राशन नहीं पहुचा सका है। शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के ग्रामसभा तौलिहवाँ, बालानगर, कचरियहवां, खैरी ऊर्फ झुंगहवा, मटियार ऊर्फ भुतहवाँ आदि दर्जनों मैरूड गाँवो मे लोग छतो पर रहने के लिए मजबूर है। लोग भूख-प्यास से झटपटाते रहे लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई सहायता नही मिली।
सीएम ने निर्देश दिया था कि बाढ़ पीड़ित कोई भी भूखा ना रहे, हर व्यक्ति तक मदद पहुचे। लापरवाही बरतने वालों पर कार्यवाई होगी। बावजूद इसके शनिवार को स्थिति निराशाजनक रही। शोहरतगढ़ तहसील के तौलिहवाँ ग्रामसभा के बालानगर, कचरियहवां, फुलवरिया मे छ: दिनो से बाढ़ का पानी भरा होने के कारण भोजन-पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। बच्चे तीन दिनों से भूखे हैं। सरकारी सहायता के रूप मे तीन दिन पहले लाई-चना कुछ लोगों बाटा गया था मगर उसके बाद कोई अधिकारी कर्मचारी झाकने तक नही आया।
गडरखा ग्रामसभा के ललाउ और नान्हू को तीन दिनो से छत पर रहकर गुजारा करना पड रहा है लेकिन कोई उनका हाल लेने वाला नही है। लगभग यही हाल शोहरतगढ़ तहसील के सभी गाँवों का है जहाँ प्रशासन सिर्फ कोरम पूरा कर रहा है।
मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश के बावजूद भी प्रशासन उन गाँवो मे भी 24 घंटे राशन नहीं पहुचा सका है। शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के ग्रामसभा तौलिहवाँ, बालानगर, कचरियहवां, खैरी ऊर्फ झुंगहवा, मटियार ऊर्फ भुतहवाँ आदि दर्जनों मैरूड गाँवो मे लोग छतो पर रहने के लिए मजबूर है। लोग भूख-प्यास से झटपटाते रहे लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई सहायता नही मिली।
सीएम ने निर्देश दिया था कि बाढ़ पीड़ित कोई भी भूखा ना रहे, हर व्यक्ति तक मदद पहुचे। लापरवाही बरतने वालों पर कार्यवाई होगी। बावजूद इसके शनिवार को स्थिति निराशाजनक रही। शोहरतगढ़ तहसील के तौलिहवाँ ग्रामसभा के बालानगर, कचरियहवां, फुलवरिया मे छ: दिनो से बाढ़ का पानी भरा होने के कारण भोजन-पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। बच्चे तीन दिनों से भूखे हैं। सरकारी सहायता के रूप मे तीन दिन पहले लाई-चना कुछ लोगों बाटा गया था मगर उसके बाद कोई अधिकारी कर्मचारी झाकने तक नही आया।
गडरखा ग्रामसभा के ललाउ और नान्हू को तीन दिनो से छत पर रहकर गुजारा करना पड रहा है लेकिन कोई उनका हाल लेने वाला नही है। लगभग यही हाल शोहरतगढ़ तहसील के सभी गाँवों का है जहाँ प्रशासन सिर्फ कोरम पूरा कर रहा है।

