1. चौधरी अमर सिंह
2022 में चौधरी अमर सिंह अपना दल छोड़ कर समाजवादी पार्टी में शामिल होते हैं लेकिन शोहरतगढ विधानसभा की सीट गठबंधन में अखिलेश यादव ओम प्रकाश राजभर को दे देते हैं जिसके कारण अमर सिंह चौधरी 2022 में ही चुनाव से ठीक पहले फिर पार्टी बदल लेते हैं और आजाद समाज पार्टी ज्वाइन कर लेते हैं। आजाद समाज पार्टी से 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ते हैं लेकिन वह चुनाव हार जाते हैं और अब आजाद समाज पार्टी छोड़कर फिर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं।
2. राधा रमण त्रिपाठी
राधा रमण त्रिपाठी बीजेपी छोड़कर बहुजन समाज पार्टी में शामिल में होते हैं और पार्टी उन्हें 2022 में टिकट देती है। चुनाव लड़ते हैं लेकिन हार जाते हैं। नतीजे आने के कुछ महीने बाद ही राधा रमण त्रिपाठी वापस बीजेपी में शामिल हो जाते हैं।
3. हरी शंकर सिंह
हरी शंकर सिंह इटवा विधान सभा से हैं। 2022 में वह बीजेपी छोड़कर बसपा में शामिल होते हैं। बसपा उन्हें विधानसभा का टिकट भी देती हैं लेकिन वह चुनाव हार जाते हैं। बाद में वापस भाजपा में शामिल हो जाते हैं।
4- सचिदानंद पांडेय
2022 में डुमरियागंज विधानसभा सीट से कांग्रेस पार्टी ने सचिदानंद पांडेय की पत्नी कांति पांडेय को उम्मीदवार बनाया था लेकिन वह चुनाव हार गई। जिसके कुछ महीनों बाद सचिदानंद पांडेय भी बीजेपी का दामन थाम लेते हैं।
5. चिंकू यादव
चिंकू यादव समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेताओं में से एक थे। वह दो बार डुमरियागंज विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी ने इन्हे उम्मीदवार बनाया था लेकिन दोनो बार चुनाव हार गए। 2022 के विधानसभा चुनाव में चिंकू यादव की जगह बसपा छोड़ सपा में शामिल हुई सैयदा खातून को सपा ने टिकट दिया और वह चुनाव जीत गईं।
चिंकू यादव ने उस वक्त पार्टी नहीं छोड़ी थी. वह 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए थे लेकिन 2024 में जब उनका टिकट कटा तब उन्होंने समाजवादी पार्टी छोड़ी और पार्टी छोड़ने का आरोप इटवा से विधायक माता प्रसाद पाण्डेय पर लगा या।
