निज़ाम अंसारी शोहरतगढ़ सिद्धार्थ नगर
प्रकृति ने महिला को जीवन में कई तरह के आयाम आते हैं कभी महिला एक बेटी , पत्नी तो बहु और सास के रूप में जानी जाती है महिला जितनी नाजुक होती है वह उतनी शसक्त भी होती है लेकिन समाज में अभी जो सम्मान महिला को मिलना चाहिए वह नहीं मिल पाता है इसके विपरीत उसे घर और समाज में पीड़ा पहुँचाया जाता है इस संबंध में शिवपति इण्टर कालेज शोहरतगढ़ में वी फाउंडेशन सिद्धार्थनगर इकाई के द्वारा महिलाओं के विधिक सशक्तिकरण सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें महिलाओं के विरुद्ध घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम-2005 के सम्बन्ध में विस्तार से छात्राओं को बताया गया।
सेमिनार को सम्बोधित करते हुए सेवानिवृत डीआईजी व फाउंडेशन के फाउंडर प्रेसीडेंट रतन कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाएं-युवतियां घरेलू हिंसा और कार्य स्थल पर भयमुक्त रहें और किसी भी विषम स्थित मैं शिकायत करें। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण एवं घरेलू हिंसा से बचाने के लिए सामाजिक सोच में परिवर्तन लाना आवश्यक है।महिलाओं के विरुद्ध घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम-2005 के अंतर्गत महिलाओं को सुरक्षा व संरक्षण मिलता है।थाना शोहरतगढ़ के उपनिरीक्षक रविकान्त मणि त्रिपाठी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से समाज में जागरूकता पैदा होता है।
उन्होंने कहा कि कानून और उसकी उपयोगिता समाज के लिए होती है।आज के परिवेश में बालिकाओं को सशक्त बनने की आवश्यकता है।प्रधानाचार्य नलिनीकांत मणि त्रिपाठी ने कहा कि सभी महिलाएं अपने कार्यस्थल पर बिना हिचके अपनी बात बेबाकी से रखें चाहे वह घर में हो या स्कूल में या फिर बाहर कहीं अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने से उन्हें मदद जरूर मिलेगी समाज में धीरे ही सही पर समाज महिला अधिकारों के प्रति सोच बढ़ रही है ऐसे में उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं बस उन्हें एक कदम बढ़ाना है। मिशन शक्ति की कांस्टेबल सीखा सिंह ने कहा कि महिलाएं व बालिकाओं को सशक्त बनना ही चाहिए। इस दौरान डॉ. नलिनीकांत मणि त्रिपाठी, सीखा सिंह, सोनम गुप्ता रविकांत मणि त्रिपाठी व छात्राएं मौजूद रहे।
प्रकृति ने महिला को जीवन में कई तरह के आयाम आते हैं कभी महिला एक बेटी , पत्नी तो बहु और सास के रूप में जानी जाती है महिला जितनी नाजुक होती है वह उतनी शसक्त भी होती है लेकिन समाज में अभी जो सम्मान महिला को मिलना चाहिए वह नहीं मिल पाता है इसके विपरीत उसे घर और समाज में पीड़ा पहुँचाया जाता है इस संबंध में शिवपति इण्टर कालेज शोहरतगढ़ में वी फाउंडेशन सिद्धार्थनगर इकाई के द्वारा महिलाओं के विधिक सशक्तिकरण सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें महिलाओं के विरुद्ध घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम-2005 के सम्बन्ध में विस्तार से छात्राओं को बताया गया।
सेमिनार को सम्बोधित करते हुए सेवानिवृत डीआईजी व फाउंडेशन के फाउंडर प्रेसीडेंट रतन कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाएं-युवतियां घरेलू हिंसा और कार्य स्थल पर भयमुक्त रहें और किसी भी विषम स्थित मैं शिकायत करें। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण एवं घरेलू हिंसा से बचाने के लिए सामाजिक सोच में परिवर्तन लाना आवश्यक है।महिलाओं के विरुद्ध घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम-2005 के अंतर्गत महिलाओं को सुरक्षा व संरक्षण मिलता है।थाना शोहरतगढ़ के उपनिरीक्षक रविकान्त मणि त्रिपाठी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से समाज में जागरूकता पैदा होता है।
उन्होंने कहा कि कानून और उसकी उपयोगिता समाज के लिए होती है।आज के परिवेश में बालिकाओं को सशक्त बनने की आवश्यकता है।प्रधानाचार्य नलिनीकांत मणि त्रिपाठी ने कहा कि सभी महिलाएं अपने कार्यस्थल पर बिना हिचके अपनी बात बेबाकी से रखें चाहे वह घर में हो या स्कूल में या फिर बाहर कहीं अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने से उन्हें मदद जरूर मिलेगी समाज में धीरे ही सही पर समाज महिला अधिकारों के प्रति सोच बढ़ रही है ऐसे में उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं बस उन्हें एक कदम बढ़ाना है। मिशन शक्ति की कांस्टेबल सीखा सिंह ने कहा कि महिलाएं व बालिकाओं को सशक्त बनना ही चाहिए। इस दौरान डॉ. नलिनीकांत मणि त्रिपाठी, सीखा सिंह, सोनम गुप्ता रविकांत मणि त्रिपाठी व छात्राएं मौजूद रहे।