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| लखनऊ के चिनहट में जलती होलिका |
होली का हीरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप नामक दैत्य की बहन और प्रह्लाद नामक विष्णु भक्त की बुआ थी। होलिका का जन्म सोरों सुकरक्षेत्र उत्तर प्रदेश राज्य के कासगंज जनपद में हुआ था। यहाँ प्रत्येक अमावस्या, सोमवती अमावस्या, पूर्णिमा, रामनवमी, आदि अवसरों पर तीर्थयात्रियों का बड़ी संख्या में आवागमन होता है।
राजा हिरण्यकश्यप अहंकार वश खुद को भगवान मानने लगा था, वह चाहता था कि सब केवल उसी की पूजा करें लेकिन उसके इच्छा के विपरीत उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था, प्रह्लाद की इस भक्ति हो देख हिरण्यकश्यप बहुत क्रोधित हुआ और अंत में उसने होलिका को यह आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को लेकर आग में प्रवेश कर जाए। होलिका को भगवान विष्णु से यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नही जलेगी।
आदेश का पालन करते हुए होलिका प्रह्लाद को लेकर आग में प्रवेश कर गई लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका जल गई। इसलिए होली बुराई पर अच्छाई के जीत के रूप में मनाई जाती है। तब से होलिका के अंत के खुशी में होली का उत्सव मनाया जाता है।

