रत्नेश कुमार:असम एक अति संवेदनशील राज्य है. इसे राष्ट्रवादी रोग लग गया है. इसके पहले इसे आंचलिकतावादी रोग लग गया था. इसे राष्ट्रवादी रोग लगने की खबर 3 अक्टूबर 2017 के अखबारों में आई सबसे पहले खबर गुवाहाटी के शिशु सारथी हैं शिशु सारथी विशेष सक्षम बच्चों के लिए गंभीरता पूर्वक काम करने वाली असम की एक अग्रणी और प्रतिष्ठित संस्था है यह संस्था विशेष सक्षम यानी दिव्यांग बच्चों के हित और अधिकारों के लिए निरंतर प्रयास करती रहती है. इसके निदेशक अरमान अली हैं.
उन्हें पाकिस्तानी बोलने वाले के विरुद्ध उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा क्योंकि उनके साथ बच्चे भी थे. उन्होंने कुछ ना बोलने में ही अपनी और अपनी भतीजियों की भलाई समझी. उन्होंने खून का घूंट पी लिया उन्हें लगा कि वह प्रतिरोध करेंगे तो भीड़ उनके साथ मारपीट करने लगेगी. भीड का क्या भरोसा राष्ट्रवादी रोगियों की भीड़ में इंसानियत नहीं होती. शिशु सारथी के निदेशक अरमान अली को यह भी लगता है कि उन्हें पाकिस्तानी बोलने वाले को शायद यह मालूम ना हो की वे मुसलमान हैं जैसे मालूम नहीं था कि वे राष्ट्रगान के दौरान खड़े क्यों नहीं हुए? क्यों बैठे रहे? उनके राष्ट्रगान के दौरान बैठे रहने की एक खास वजह थी और वह यह कि वह खड़े नहीं हो सकते थे. वे विशेष सक्षम यानी दिव्यांग है. अरमान अली पाकिस्तानी सुनकर आहत हैं. अंदर से बेचैन है. उनकी जगह पर कोई भी होता तो उसका खून खोलता. उन्होंने अपने साथ हुए लज्जाजनक और दुखद प्रकरण को मीडिया को बताया ताकि लोग जाने, सोचें और विचार करें कि राष्ट्रगान के दौरान उनका उठ कर खड़ा होना अस्वभाविक नहीं था? उन्हें पाकिस्तानी बोलना सही था?
अरमान अली दुख और क्षोभ से भरे हैं वह कहते हैं:
मैं देश से कितना प्यार करता हूं इसे दिखाने के लिए राष्ट्रगान बजते ही खड़ा हो जाना चाहिए? यह अनिवार्यता महज एक छड्म राष्ट्रवादी विचार है. जब आप कहीं मनोरंजन के लिए जाते हैं तो आप एक दर्शक होते हैं.
असम के अरमान अली अकेले भारतीय नागरिक नहीं है जिन्हें राष्ट्रवादी रोगियों ने अपना शिकार बनाया है. राष्ट्रवादी रोग भारत के लिए घातक है पूर्वोत्तर भारत के लिए तो प्राण घातक है. हिंदुत्व की हकीकत और हुकूमत पूर्वोत्तर भाग के प्राण ले लेगी.
कांग्रेसियों के शोषण से शोषित पूर्वोत्तर भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दाल गल रही है.संघ अपनी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी से मिलकर राजनीतिक खिचड़ी पकाने में इसलिए सफल हो रहा है कि नई दिल्ली और नागपुर दोनों राजधानियां एक सुर से विकास के लिए प्रकाश की बातें कर रही हैं. छोटी मोटी नहीं बड़ी-बड़ी बातें कर रही हैं. राष्ट्रवादी रोग को विकास की दिशा के लिए अनिवार्य बताया जा रहा है.
असम की मुंदी आंखें धीरे धीरे खुल रही हैं. लेकिन हिंदू असम की ओर बढ़ चुके पैरों को सही जगह पर वापस लाने में समय लगेगा. मेघालय और त्रिपुरा विधानसभा चुनाव की ओर हैं सारी राजनीतिक दल में जारी हैं. राष्ट्रवादी लोग भी राजनीतिक सांप्रदायिक तिकड़मों का नतीजा है.
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| राष्ट्रगान के दौरान सिनेमा घर मे खडे लोग |
शिशु सारथी के निदेशक अरमान अली 28 सितंबर 2017 को अपने भतीजे भतीजीयों के साथ फिल्म देखने के लिए एक स्थानिय सिनेमा हॉल में गए. जब राष्ट्रगान बजा तो वे अपनी कुर्सी से उठ कर खड़े नहीं हुए, जबकि और फिल्म दर्शक खड़े हो गए. राष्ट्रगान खत्म होने के बाद पीछे से आवाज आई आगे कोई पाकिस्तानी बैठा है क्या. इसके बाद अरमान अली की एक भतीजी ने उनसे पूछा यहां कोई पाकिस्तानी बैठा है क्या? इस पर उन्होंने अपनी भतीजी से कहा, हां फिल्म ही इतनी अच्छी बनी है कि पाकिस्तान से भी लोग यहां सिनेमा देखने आए हैं.
अरमान अली दुख और क्षोभ से भरे हैं वह कहते हैं:
मैं देश से कितना प्यार करता हूं इसे दिखाने के लिए राष्ट्रगान बजते ही खड़ा हो जाना चाहिए? यह अनिवार्यता महज एक छड्म राष्ट्रवादी विचार है. जब आप कहीं मनोरंजन के लिए जाते हैं तो आप एक दर्शक होते हैं.
असम के अरमान अली अकेले भारतीय नागरिक नहीं है जिन्हें राष्ट्रवादी रोगियों ने अपना शिकार बनाया है. राष्ट्रवादी रोग भारत के लिए घातक है पूर्वोत्तर भारत के लिए तो प्राण घातक है. हिंदुत्व की हकीकत और हुकूमत पूर्वोत्तर भाग के प्राण ले लेगी.
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| शिशु सारथी के विकलांग बच्चे |
असम की मुंदी आंखें धीरे धीरे खुल रही हैं. लेकिन हिंदू असम की ओर बढ़ चुके पैरों को सही जगह पर वापस लाने में समय लगेगा. मेघालय और त्रिपुरा विधानसभा चुनाव की ओर हैं सारी राजनीतिक दल में जारी हैं. राष्ट्रवादी लोग भी राजनीतिक सांप्रदायिक तिकड़मों का नतीजा है.


