बाढ़ से मैरूंड खैरी ऊर्फ झुंगहवा मे नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। जलस्तर कम होते ही कटान तेज होने लगी। शनिवार सुबह कठेला-तुलसियापुर मार्ग पर झुंगहवा गांव के सामने नदी के कटान से सड़क कट गई। सड़क कटते ही नदी का रूख गाँव की तरफ मुड गया है। किसानों के उपजाऊ जमीन को नदी ने निगलना शुरू कर दिया है।
खैरी ऊर्फ झुंगहवा और मटियार के बीच बूढ़ी राप्ती नदी मे जलस्तर कम होते ही कटान तेज हो गई। जिसके चलते शनिवार सुबह झुंगहवा गाँव के पास नदी के तेज कटान से सडक कट गई। जिससे कई गाँवो का सम्पर्क टूट गया है। सड़क कटते ही नदी गाँव की तरफ घूम गई है। जिससे गरीब किसानों की उपजाऊ जमीन नदी ने निगलना शुरू कर दिया है।
अपने खेतों को नदी बनते देख किसानों का कलेजा फट रहा है बेबस किसानों के पास लापरवाह प्रशासन को कोशने के सिवा कुछ नही बचा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इतने भीषण बाढ़ मे कोई प्रशासनिक अधिकारी गाँव मे उनका हाल जानने के लिए नही आया। क्षेत्र मे राहत के नाम पर अबतक किसी सरकारी महकमा के अधिकारी कर्मचारी का पता नहीं है।
खैरी ऊर्फ झुंगहवा के मसूद आलम का आरोप है कि ऐसा लापरवाह प्रशासन जिले मे कभी नही दिखा। कटान से लोगों के खेत नदी बन रहें है सैकडो बीघा खेत बालू पटने से बरबाद हो रहें हैं। इसका जिम्मेदार लापरवाह प्रशासन है।
खैरी ऊर्फ झुंगहवा और मटियार के बीच बूढ़ी राप्ती नदी मे जलस्तर कम होते ही कटान तेज हो गई। जिसके चलते शनिवार सुबह झुंगहवा गाँव के पास नदी के तेज कटान से सडक कट गई। जिससे कई गाँवो का सम्पर्क टूट गया है। सड़क कटते ही नदी गाँव की तरफ घूम गई है। जिससे गरीब किसानों की उपजाऊ जमीन नदी ने निगलना शुरू कर दिया है।
अपने खेतों को नदी बनते देख किसानों का कलेजा फट रहा है बेबस किसानों के पास लापरवाह प्रशासन को कोशने के सिवा कुछ नही बचा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इतने भीषण बाढ़ मे कोई प्रशासनिक अधिकारी गाँव मे उनका हाल जानने के लिए नही आया। क्षेत्र मे राहत के नाम पर अबतक किसी सरकारी महकमा के अधिकारी कर्मचारी का पता नहीं है।
खैरी ऊर्फ झुंगहवा के मसूद आलम का आरोप है कि ऐसा लापरवाह प्रशासन जिले मे कभी नही दिखा। कटान से लोगों के खेत नदी बन रहें है सैकडो बीघा खेत बालू पटने से बरबाद हो रहें हैं। इसका जिम्मेदार लापरवाह प्रशासन है।

