सूचना को मुताबिक नदी का जलस्तर खतरनाक स्थिति तक पहुचने के साथ ही बाँध के टूटने की आशंका जताई जा रही थी। कई जगहो से रिसाव हो रहा था जिसकी सूचना स्थानीय लोगों ने प्रशासन को दी बावजूद इसके बांध को बचाने का कोई प्रयास नही हुआ। यही कारण है कि कुदरत के साथ प्रशासन की लापरवाही तबाही की एक नई इबारत लिख रही है। लोग तबाह और बरबाद हो रहे है लेकिन प्रशासन समय रहते कोई कार्यवाई नही करता। बांध टूटने के बाद इलाके की स्थिति भयावह हो गई। कितने मकान को पानी ने निगल लिया, कितने बेघर हो गए, कितनी संख्या मे लोगों के जान पर आफत बनी है। इसका आकलन करना बेहद मुशकिल है। चारो तरफ सैलाब इस कदर तांडव मचा रहा है कि प्रभावित गांवो मे जाने की कोई हिम्मत नही जुटा पा रहा है। ऊपर से प्रशासन की लापरवाही लोगो के लिए और मुसिबत बना हुआ है।
सिद्धार्थनगर:प्रशासन की लापरवाही बाढ़ से मची तबाही की एक नई इबारत लिख रही है
अगस्त 20, 2017
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सूचना को मुताबिक नदी का जलस्तर खतरनाक स्थिति तक पहुचने के साथ ही बाँध के टूटने की आशंका जताई जा रही थी। कई जगहो से रिसाव हो रहा था जिसकी सूचना स्थानीय लोगों ने प्रशासन को दी बावजूद इसके बांध को बचाने का कोई प्रयास नही हुआ। यही कारण है कि कुदरत के साथ प्रशासन की लापरवाही तबाही की एक नई इबारत लिख रही है। लोग तबाह और बरबाद हो रहे है लेकिन प्रशासन समय रहते कोई कार्यवाई नही करता। बांध टूटने के बाद इलाके की स्थिति भयावह हो गई। कितने मकान को पानी ने निगल लिया, कितने बेघर हो गए, कितनी संख्या मे लोगों के जान पर आफत बनी है। इसका आकलन करना बेहद मुशकिल है। चारो तरफ सैलाब इस कदर तांडव मचा रहा है कि प्रभावित गांवो मे जाने की कोई हिम्मत नही जुटा पा रहा है। ऊपर से प्रशासन की लापरवाही लोगो के लिए और मुसिबत बना हुआ है।
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