विनोद चौधरी शोहरतगढ़ सिद्धार्थनगर:मौसम के बदलते मिजाज ने अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ा दी है। अस्पताल के आंकडे़ इसकी तस्दीक करते हैं। एक सप्ताह पहले 200 से 400 मरीज ओपीडी में आते थे अब यह संख्या लगभग 1000 पहुँच गई है। इसमें अधिकतर बच्चे शामिल हैं। सरकारी से लेकर प्राइवेट तक सभी अस्पतालों में कुछ ऐसा ही हाल है।
8 बजते ही अस्पताल की पंजीयन काउंटर पर लंबी कतार लग जा रही है। पंजीयन के बाद चिकित्सक के कक्ष के बाहर नंबर का इंतजार करना पड़ता है। घंटों इंतजार के बाद चिकित्सक नए मरीजों को जांच के लिए भेजते हैँ। यहां पर कतार के बाद सैंपल दिया जाता है और जांच रिपोर्ट दोपहर एक बजे तक मिलती है। जब यहां दोबारा पहुंचते हैं और नंबर आता है तब तक चिकित्सक की ड्यूटी खत्म हो जाती है। ऐसे में बड़ी संख्या में मरीजों को दूसरे दिन आना पड़ता है। वर्तमान में अधिकांश मरीज सर्दी, जुकाम, बुखार, उल्टी-दस्त से पीड़ित आ रहे हैं। पहले की अपेक्षा मरीजों की संख्या बढ़ी है। चेस्ट से संबंधित अधिक मरीज आ रहे हैं। इससे बचने के लिए जागरूकता ही अहम उपचार है।
अभिभावकों की जागरूकता के अभाव में बच्चे उल्टी-दस्त, बुखार की चपेट में आ जा रहे हैं। उन्हें उपचार के साथ ही जरूरी सलाह भी दी जा रहे हैं।
मासूमों से पटा जनरल वार्ड
संयुक्त अस्पताल के जनरल वार्ड में मासूमों के लिए स्थापित सभी बेड भरे पड़े हुए हैं। हर दिन दो-चार मासूम भर्ती हो रहे हैं। इनके इलाज के लिए सुबह-शाम राउंड लगा रहे हैं।
अस्पताल आने वाले मरीजों के इलाज को लेकर हर चिकित्सक दायित्वों व कर्तव्यों के प्रति सचेत हैं। सुबह 8 बजे से 2 बजे तक मरीजों को देखने, जांच की सुविधा समय से देने के लिए सभी को कड़ी हिदायत दी गई है। जानबूझकर लापरवाही करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
8 बजते ही अस्पताल की पंजीयन काउंटर पर लंबी कतार लग जा रही है। पंजीयन के बाद चिकित्सक के कक्ष के बाहर नंबर का इंतजार करना पड़ता है। घंटों इंतजार के बाद चिकित्सक नए मरीजों को जांच के लिए भेजते हैँ। यहां पर कतार के बाद सैंपल दिया जाता है और जांच रिपोर्ट दोपहर एक बजे तक मिलती है। जब यहां दोबारा पहुंचते हैं और नंबर आता है तब तक चिकित्सक की ड्यूटी खत्म हो जाती है। ऐसे में बड़ी संख्या में मरीजों को दूसरे दिन आना पड़ता है। वर्तमान में अधिकांश मरीज सर्दी, जुकाम, बुखार, उल्टी-दस्त से पीड़ित आ रहे हैं। पहले की अपेक्षा मरीजों की संख्या बढ़ी है। चेस्ट से संबंधित अधिक मरीज आ रहे हैं। इससे बचने के लिए जागरूकता ही अहम उपचार है।
अभिभावकों की जागरूकता के अभाव में बच्चे उल्टी-दस्त, बुखार की चपेट में आ जा रहे हैं। उन्हें उपचार के साथ ही जरूरी सलाह भी दी जा रहे हैं।
मासूमों से पटा जनरल वार्ड
संयुक्त अस्पताल के जनरल वार्ड में मासूमों के लिए स्थापित सभी बेड भरे पड़े हुए हैं। हर दिन दो-चार मासूम भर्ती हो रहे हैं। इनके इलाज के लिए सुबह-शाम राउंड लगा रहे हैं।
अस्पताल आने वाले मरीजों के इलाज को लेकर हर चिकित्सक दायित्वों व कर्तव्यों के प्रति सचेत हैं। सुबह 8 बजे से 2 बजे तक मरीजों को देखने, जांच की सुविधा समय से देने के लिए सभी को कड़ी हिदायत दी गई है। जानबूझकर लापरवाही करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

