सिद्धार्थनगर:अब जिले में शराब कारोबार में महिलाओं की भी भागीदारी बढ़ गई है। शराब के दुकानों के लिए महिलाओं ने बढ़ चढ़ के आवेदन किया था। विदेशी शराब की 33 प्रतिशत दुकाने अब महिलाओं के पास हैं।
जिले में शराब की 257 दुकाने है। जिनमे से अब 57 शराब के दुकान महिलाओं के पास है। वही बियर की 6 दुकाने भी महिलाओं को मिली हैं।
जिले में इस बार पुराने शराब कारोबारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। पहले की व्यवस्था में शराब की कुल 259 दुकानों को कुछ प्रमुख दुकानदारों ने आपस में बाट रखा था। नाम किसी और का होता था लेकिन दुकान के असली मालिक वही होते थे। हर एक कारोबारी के पास दर्ज़नो दुकाने होती थी।
नई व्यवस्था के तहत बदलाव हुआ व बहुत से ऐसे नए चेहरे शराब के कारोबार से जुड़ गए हैं, जिनका इससे दूर दूर तक कोई सम्बन्ध नही था।
दैनिक जागरण के एक रिपोर्ट के मुताबिक कलेक्ट्रेट परिसर में एक चाय बेचने वाला अब बियर के दुकान का मालिक बन गया हैं। ऐसे ही कई लोग है जिन्होंने इस कारोबार में पहली बार कदम रखा है।
वही जिले में लगभग 80 प्रतिशत शराब के दुकानों के मालिक बदल गए हैं।
पुराने कारोबारियों को इस बार झटका लगा है, जो कल तक 20 से 30 शराब के दुकानों के मालिक हुआ करते थे उन्हें इस वर्ष सिर्फ एक ही दुकान से संतोष करना पड़ा।
जिले में शराब की 257 दुकाने है। जिनमे से अब 57 शराब के दुकान महिलाओं के पास है। वही बियर की 6 दुकाने भी महिलाओं को मिली हैं।
जिले में इस बार पुराने शराब कारोबारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। पहले की व्यवस्था में शराब की कुल 259 दुकानों को कुछ प्रमुख दुकानदारों ने आपस में बाट रखा था। नाम किसी और का होता था लेकिन दुकान के असली मालिक वही होते थे। हर एक कारोबारी के पास दर्ज़नो दुकाने होती थी।
नई व्यवस्था के तहत बदलाव हुआ व बहुत से ऐसे नए चेहरे शराब के कारोबार से जुड़ गए हैं, जिनका इससे दूर दूर तक कोई सम्बन्ध नही था।
दैनिक जागरण के एक रिपोर्ट के मुताबिक कलेक्ट्रेट परिसर में एक चाय बेचने वाला अब बियर के दुकान का मालिक बन गया हैं। ऐसे ही कई लोग है जिन्होंने इस कारोबार में पहली बार कदम रखा है।
वही जिले में लगभग 80 प्रतिशत शराब के दुकानों के मालिक बदल गए हैं।
पुराने कारोबारियों को इस बार झटका लगा है, जो कल तक 20 से 30 शराब के दुकानों के मालिक हुआ करते थे उन्हें इस वर्ष सिर्फ एक ही दुकान से संतोष करना पड़ा।

