सिद्धार्थनगर बढ़नी नगर पंचायत वाहन शुल्क अड्डा अब गुंडागर्दी व अवैध वसूली का अड्डा बन गया है। वाहन चालको को 100 रुपए की पर्ची देकर 150 से 200 रुपए वसूला जा रहा है। जिसकी शिकायत प्रशासन से की गई लेकिन अभी तक कार्यवाई के नाम केवल खानापूर्ति ही हुआ है।
भारत नेपाल सीमा पर स्थिति नगर पंचायत बढ़नी राष्ट्रीय राजमार्ग 730 से होकर देश भर से सैकड़ो की संख्या में ट्रक नेपाल जाने के लिए आते हैं। तो वही टैम्पों चालकों व अन्य वाहनों से वाहन शुल्क के नाम पर 100 से 200 रुपए तक वसूला जा रहा है।
शिकायत के बाद प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जांच की गई। जिसमे वाहन चालकों ने अधिकारियों से अवैध वसूली की बात कही बावजूद उसके अभी तक इस मामले में कोई ठोस कार्यवाई नही की गई।
इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर भी शिकायत की गई है लेकिन अभी तक कोई कार्यवाई नही हुई है। जानकारी के मुताबिक नगरपंचायत का वाहन शुल्क मात्र 20 रुपए है।
इस बारे में बढ़नी से हमे एक वीडियो भेजा गया जिसमे अवैध वसूली का पूरा खेल साफ नज़र आ रहा है। वीडियो में गाड़ी मालिक व ड्राइवर ने बताया कि नगर पंचायत की तरफ से उन्हें 100 रुपए की पर्ची देकर 180 रुपए की मांग की गई। बाद में 150 रुपए वसूला गया।
ड्राइवर के मुताबिक वसूली कर रहे लोगों ने कहा कि नेपाल बॉर्डर पर 50 रुपए पुलिस की एंट्री फीस है।
ड्राइवर ने अपनी आपबीती बताते हुए बोला कि हम बाहर से आते हैं पैसा मांगने पर यदि हम कोई आपत्ति करें तो ये गाली गलौज व मारपीट करने की बात करते हैं।
हम आपको बता दें कि ये पूरा खेल पुलिस के नज़रों के सामने होता बढ़नी तिराहे पर सुबह से शाम तक 4 से 5 पुलिसकर्मी मौजूद रहते है। तो वही ढेबरुआ थाना बढ़नी से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर हैं।
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गुंडागर्दी करें तो आप 100 नम्बर डायल करें
जिसपर ड्राइवर ने बताया कि 100 नम्बर पर काल करने पर कोई सुनवाई नही होती, 100 डायल के लोग कहते है कि मेरे पास क्यों फ़ोन किया 70, 80 रुपए देकर मामला खुद ही खत्म कर लो।
लखीमपुर खीरी से गाड़ी लेकर पहली बार नेपाल बॉर्डर आए सतनाम सिंह ने 100 रुपए की पर्ची दिखाते हुए बताया कि वह यहां पहली बार आए हैं। नगर पंचायत ने वाहन शुल्क के नाम पर उनसे 100 रुपए वसूल लिए।
शिकायतों के बाद भी कोई कार्यवाई नही होने से लोगों में नाराज़गी है। बाहर से आने वाले वाहन चालकों को डरा धमका कर जबरन 100 से 200 रुपए तक वसूला जा रहा है। जांच के बाद भी कार्यवाई ना होने से ये साफ हो गया है कि अवैध वसूली का यह खेल में प्रशासन के मिलीभगत से चल रहा है।

