बलरामपुर:नगर निकाय चुनाव में भाजपा को इतनी करारी हार का अंदाजा नही था। प्रत्याशियो को जिताने के लिए सीएम योगी से लेकर कई मंत्रियो ने तूफानी दौरा कर प्रत्याशियो को जिताने की अपील की लेकिन वह भी काम नही आया।
जिले मे दो नगरपालिका परिषद व दो नगरपंचायत परिषद है। पूर्व मे नगरपालिका परिषद बलरामपुर अध्यक्ष की सीट सपा के पास थी। उतरौला नगरपालिका परिषद की सीट पर भाजपा काबिज थी। नगरपंचायत पचपेड़वा व तुलसीपुर व पचपड़ेवा में तो निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत का परचम लहराया खास बात तो यह है कि इन सभी स्थानों पर भाजपा विधायकों का कब्जा है फिर भी इन सभी स्थानों पर भाजपा एक भी सीट पर कब्जा नहीं जमा सकी ना कोई चमत्कार दिखा सके।
पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की मानें तो टिकट वितरण में उपजे विवाद को शीर्ष नेतृत्व ने गंभीरता से नहीं लिया जबकि भाजपा के पक्ष में उपमुख्यमंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा ने उतरौला पहुंचकर जनता जनार्दन से जिताने की अपील भी की थी। लेकिन जनता ने अपील को नकार दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलरामपुर में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए प्रत्याशी को नहीं बल्कि कमल के फूल पर वोट देने की अपील की थी। लेकिन जनता ने उनकी अपील को ठुकरा दिया। पूर्व में भी टिकट वितरण को लेकर दावेदारों ने प्रदर्शन किया था जिसके बाद शीर्ष पदाधिकारियों ने बात सलटा लेने की कही पदाधिकारियों ने चुनाव जिताने की बात कहकर श्रेष्ठ पदाधिकारियों को झूठी रिपोर्ट देकर गुमराह किया जिसका हश्र यह हुआ कि भाजपा एक भी सीट पर कब्जा नहीं जमा सकी।
जिले मे दो नगरपालिका परिषद व दो नगरपंचायत परिषद है। पूर्व मे नगरपालिका परिषद बलरामपुर अध्यक्ष की सीट सपा के पास थी। उतरौला नगरपालिका परिषद की सीट पर भाजपा काबिज थी। नगरपंचायत पचपेड़वा व तुलसीपुर व पचपड़ेवा में तो निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत का परचम लहराया खास बात तो यह है कि इन सभी स्थानों पर भाजपा विधायकों का कब्जा है फिर भी इन सभी स्थानों पर भाजपा एक भी सीट पर कब्जा नहीं जमा सकी ना कोई चमत्कार दिखा सके।
पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की मानें तो टिकट वितरण में उपजे विवाद को शीर्ष नेतृत्व ने गंभीरता से नहीं लिया जबकि भाजपा के पक्ष में उपमुख्यमंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा ने उतरौला पहुंचकर जनता जनार्दन से जिताने की अपील भी की थी। लेकिन जनता ने अपील को नकार दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलरामपुर में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए प्रत्याशी को नहीं बल्कि कमल के फूल पर वोट देने की अपील की थी। लेकिन जनता ने उनकी अपील को ठुकरा दिया। पूर्व में भी टिकट वितरण को लेकर दावेदारों ने प्रदर्शन किया था जिसके बाद शीर्ष पदाधिकारियों ने बात सलटा लेने की कही पदाधिकारियों ने चुनाव जिताने की बात कहकर श्रेष्ठ पदाधिकारियों को झूठी रिपोर्ट देकर गुमराह किया जिसका हश्र यह हुआ कि भाजपा एक भी सीट पर कब्जा नहीं जमा सकी।

