सिद्धार्थनगर समाज कल्याण विभाग ने जिंदा महिला को कागज़ों में मृत घोषित कर पेंशन बंद कर दी। अब महिला खुद को ज़िंदा साबित करने के लिए अफसरों के दफ्तेरो का चक्कर काट रही है।
अमर उजाला के रिपोर्ट में मनीष जयसवाल ने इस मामले का खुलासा किया। उसका ब्लॉक के परसा महापात्र गांव की रहने वाली राजमती देवी 78 वर्ष की है। वर्षो से राजमती देवी को पेंशन मिलती आ रही है लेकिन लगभग एक वर्ष से उनकी पेंशन रोक दी गई है। 6 माह बाद पेंशन ना मिलने पर जब उन्होंने बैंक से संपर्क किया तो बताया गया की पेंशन ऊपर से रोक दी गई है। बेबस महिला जब समाज कल्याण के दफ्तर पहुची तो सत्यापन रिपोर्ट में उन्हें मृत दर्शाया गया था। विभागीय अफसरों द्वारा पल्ला झाड़ने के बाद तहसील दिवस में शिकायत हुई तो डीएम ने जवाब तलब किया। समाज कल्याण के अफसर ने ने दलील दी कि पेंशन को दोबारा चालू करने की व्यवस्था जिला स्तर पर नही है, लिहाज़ा वह विवस है।
पीड़ित रामराजी अपने बेटे विनोद को लेकर खुद को ज़िंदा साबित करने के लिये दर दर भटक रही है। उनका बेटा मज़दूरी करके परिवार का भरण पोषण करता है। पेंशन से किछ मदद मिल जाती थी। लेकिन अब वह पाई पाई को मोहताज़ हैं।
सोनमती को भी कागज़ों मर चुकी है, राजमति की तरह ही खेसरहा ब्लॉक के अर्ज़ी गांव की रहने वाली सोनमती पत्नी भग्गू की भी है। जीवित होने के बाद भी सरकारी फाइलो में उन्हें मार दिया गया है। शिकायत के बाद हरकत में आये खण्ड विकास अधिकारी ने रिपोर्ट में लाभार्थी को जीवित बताते हुए पेंशन शुरू करने को कहा है।
रिपोर्ट के मुताबित परसा महापात्रा गांव निवासी केसारा देवी की पेंशन अगस्त 2017 से नही आयी है। कई बार सम्पर्क के बाद भी जिम्मेदारों के तरफ से उन्हें कोई जवाब नही मिला। आशंका है की स्तयापन रिपोर्ट में उन्हें भी मार डाला गया है फिलहाल वह शिकायत करने की तैयारी में हैं।

